शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

दिल्ली द्वीप को देखता सूर्य

शाम की बस
चढ़ रही थी फ्लाईओवर पर
चारों ओर फैले
धूल व धूएं के अम्बार के पार से
दिल्ली द्वीप को देखता
एक धुसर बुदबुद सा
डूब रहा था सूर्य
मेरे भीतर।

मुखर बौद्धिक कवि : कुमार मुकुल ... कृष्ण समिद्ध

( आज मुकुल जी को दुसरी बार सुना...मुझे उनके स्वेत धवल बालों से जलन हैं...वो मुझे भी चाहिए था .) कविता तब दीर्घजीवी होती है ....जब समय को ...