शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

दिल्ली द्वीप को देखता सूर्य

शाम की बस
चढ़ रही थी फ्लाईओवर पर
चारों ओर फैले
धूल व धूएं के अम्बार के पार से
दिल्ली द्वीप को देखता
एक धुसर बुदबुद सा
डूब रहा था सूर्य
मेरे भीतर।

फेशबुक - एक आत्‍मालोचना

अपना चेहरा उठाए खडे हैं हम बारहा मुकाबिल आपके अब आंखें हैं पर द़ष्टि नहीं है मन हैं पर उसकी उडान की बोर्ड से कंपूटर स्‍क्रीन तक है...