बुधवार, 7 जुलाई 2010

आदमियत - मैं हवा को पहनकर सोना चाहता हूं

मैं

हवा को पहनकर
सोना

और

धूप को पहनकर
जागना चाहता हूं

यह
एक आदिम ईच्‍छा है

इस ईच्‍छा पर
नियंत्रण का नाम है

आदमियत...

मुखर बौद्धिक कवि : कुमार मुकुल ... कृष्ण समिद्ध

( आज मुकुल जी को दुसरी बार सुना...मुझे उनके स्वेत धवल बालों से जलन हैं...वो मुझे भी चाहिए था .) कविता तब दीर्घजीवी होती है ....जब समय को ...