गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

नदी और पुल

नदी और पुल

नदी में पानी नहीं
फिर भी यह पुल
पुल है

रेत की नदी भी
नदी कहलाती है

जबतक यह पुल है
नदी रहेगी
मौसमों का इंतजार करती हुई

नदी और पुल - २

नदी पार करने की ईच्छा में
जब नदी पार करने का साहस मिलता है
तो नदी पार करने की सहूलियत
बनाती है पुल

2 टिप्‍पणियां:

अरुण चन्द्र रॉय ने कहा…

आदरणीय मुकुल सर आपकी इस कविता की प्रतिक्रिया में आपकी अनुमति मानते हुए अपनी एक कविता प्रस्तुत करता हूँ...यह कविता मेरे ब्लॉग पर २३ जून २०१० को प्रकाशित हुई थी...

नदी और पुल

नदी
और पुल
के बीच है
अनोखा रिश्ता,
पुल खड़ा करता रहेगा
इन्तजार
नदी
यू ही बहती रहेगी
अनवरत


नदी
लगातार मारती रहेगी
हिलोर
पुल
यो ही शांत रहेगा खड़ा
शाश्वत
क्योंकि उसे पता है
दोनों का प्रारब्ध


पुल की ओर से
नदी लगती है
बहुत खूबसूरत
नदी की ओर से
पुल लगता है
असंभव
जबकि
पुल की जड़े
कायम होती है नदी में,
नदी समझ नहीं पाती कभी

वन्दना ने कहा…

बेहद गहन अभिव्यक्तियां…………बहुत कुछ कह गयीं।
नव वर्ष मंगलमय हो।

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