सोमवार, 27 जून 2011

मुझे जीवन ऐसा ही चाहिए था...

यह लिखते
कितनी शर्म आएगी

कि मैंने
कष्ट सहे हैं

हाँ सहे हैं ...

मुझे जीवन
ऐसा ही चाहिए था

अपने मुताबिक़

अपनी गलतियों से
सज़ा धजा ....!

फेशबुक - एक आत्‍मालोचना

अपना चेहरा उठाए खडे हैं हम बारहा मुकाबिल आपके अब आंखें हैं पर द़ष्टि नहीं है मन हैं पर उसकी उडान की बोर्ड से कंपूटर स्‍क्रीन तक है...