सोमवार, 27 जून 2011

मुझे जीवन ऐसा ही चाहिए था...

यह लिखते
कितनी शर्म आएगी

कि मैंने
कष्ट सहे हैं

हाँ सहे हैं ...

मुझे जीवन
ऐसा ही चाहिए था

अपने मुताबिक़

अपनी गलतियों से
सज़ा धजा ....!

मुखर बौद्धिक कवि : कुमार मुकुल ... कृष्ण समिद्ध

( आज मुकुल जी को दुसरी बार सुना...मुझे उनके स्वेत धवल बालों से जलन हैं...वो मुझे भी चाहिए था .) कविता तब दीर्घजीवी होती है ....जब समय को ...