शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

फेशबुक - एक आत्‍मालोचना

अपना चेहरा उठाए
खडे हैं हम बारहा
मुकाबिल आपके

अब आंखें हैं
पर द़ष्टि नहीं है

मन हैं
पर उसकी उडान
की बोर्ड से कंपूटर स्‍क्रीन तक है

काम कम है हमारे पास
और उपलब्धियां हैं बेशुमार

जहालत और पीडा से भरे
इस जहान में
अपना चेहरा लिए
खडे हैं हम

सबसे असंपृक्‍त

पहले आप
पहले आप की संस्‍क़ति
संभालते हुए

5 टिप्‍पणियां:

रश्मि प्रभा... ने कहा…

badhiyaa

डॉ .अनुराग ने कहा…

शानदार !!!!

VMW Team ने कहा…

बहुत ही बढ़िया !

Abnish Singh Chauhan ने कहा…

पहले आप
पहले आप की संस्कृति
संभालते हुए
और यही संस्कृति हमें ऊर्जा देती है. बहुत सुन्दर कविता है आपकी. बधाई स्वीकारें

संजय भास्कर ने कहा…

उम्दा सोच
भावमय करते शब्‍दों के साथ गजब का लेखन ...आभार ।

फेशबुक - एक आत्‍मालोचना

अपना चेहरा उठाए खडे हैं हम बारहा मुकाबिल आपके अब आंखें हैं पर द़ष्टि नहीं है मन हैं पर उसकी उडान की बोर्ड से कंपूटर स्‍क्रीन तक है...